जयपुर। जयपुर के पूर्व राजपरिवार ने नगर निगम के साथ मिलकर उनकी सम्पत्ति हड़पने का आरोप लगाया है। इस सम्बंध में सिटी पैलेस के प्रशासनिक अधिकारी ने माणकचौक थाने में तीन मामले दर्ज करवाए है। पुलिस के अनुसार सिटी पैलेस के प्रशासनिक अधिकारी सिद्धार्थ सिंह ने मामला दर्ज करवाया कि कमल गट्टा कॉलोनी में स्थित सम्पत्ति पर कई बदमाशों ने कब्जा कर हड़पने का प्रयास किया है। इस मामले में मुकदमा नम्बर 239 में सिद्धार्थ सिंह ने राकेश अग्रवाल, श्याम विहारी गर्ग, अशोक बंसल सहित अन्य के खिलाफ नगर निगम के साथ मिलकर उसकी सम्पत्ति हड़पने का आरोप लगाया है।
मुकदमा नम्बर 240 में सिद्धार्थ सिंह ने राजेंद्र कुमार पंसारी, गौरी शंकर, मंगल सिंह सहित अन्य लोगों के खिलाफ नगर निगम से मिलीभगत कर सम्पत्ति हड़पने का आरोप लगाया है। मुकदमा नम्बर 241 में सिद्धार्थ सिंह ने हर्षद जैसवाल, ओमप्रकाश शर्मा, हनुमान और दिनेश शर्मा सहित अन्य लोगों पर सम्पत्ति हड़पने का आरोप लगाया है।
जानकारी के मुताबिक यह प्रॉपर्टी गोविंद देव मंदिर के पास कमलगट्टा कॉलोनी में है। यह जगह सिटी पैलेस से करीब 1 किलोमीटर की दूरी पर है। एफआईआर में आरोप लगाया है कि इन लोगों ने सवाई भवानी सिंह के नाम से फर्जी आवंटन पत्र बनवाया है।
सीआई गुरू भूपेंद्र ने बताया कि पूर्व राजपरिवार की संपत्ति कमलगट्टा कॉलोनी में है। यहां काफी दिनों से नगर निगम आसपास से हटाए गए थड़ी, ठेले, अनाधिकृत टीन शेड डालता था। सिटी पैलेस ने उसे पिछले हटाया था। सिद्धार्थ सिंह ने एफआईआर में कहा कि इससे नाराज होकर राधा मोहन पुत्र ईश्वर लाल ने नगर निगम के अधिकारियों की मिलीभगत से षडयंत्रपूर्वक फर्जी कागज तैयार किए और संपत्ति को हड़पने की कोशिश की।
सिटी पैलेस के प्रशासनिक अधिकारी सिद्धार्थ सिंह ने बताया कि राजपरिवार के स्वामित्व और कब्जे की संपत्ति पर नगर निगम ने काफी सालों से नाजायज तरीके से कब्जा कर रखा था। उसे हटवाने के बाद से वहां पर राजपरिवार के स्वामित्व की संपत्ति होने का बोर्ड लगा हुआ है। ये लोग 7 सिंतबर 2024 को संपत्ति पर आए। जब मैंने इन लोगों से संपत्ति के दस्तावेज मांगे तो इन लोगों ने प्लाट संख्या 7, कमल गट्टा कॉलोनी के फर्जी और बनावटी दस्तावेज दिए।
उसमें 2010 का विक्रय पत्र व अन्य दस्तावेज थे। दस्तावेज में दिखाया गया कि प्लॉट को कर्नल भवानी सिंह जी की ओर से उनके हक में आवंटित किया गया है, उन्होंने इस आवंटन-पत्र की कोई प्रति हमें दस्तावेजों के साथ नहीं दी। सवाई भवानी सिंह ने कभी भी उस जमीन का कोई आवंटन पत्र जारी नहीं किया।