जयपुर। आराध्य गोविंददेवजी मंदिर में झूला महोत्सव का शुभारंभ हुआ। ये झूला महोत्सव रक्षाबंधन तक चलेगा। झूला महोत्सव में ठाकुरजी राधा रानी संग रियासतकालीन चांदी के झूले में झुलें। महोत्सव में ठाकुरजी को लहरिया और जामा पोशाक धारण करवाई गई। मंदिर के सेवाधिकारी मानस गोस्वामी ने बताया कि झूला महोत्सव से पूर्व ठाकुरजी पताका आसन पर विराजमान थे।
श्रावण कृष्ण एकादशी से इन्हे झूले के आसन पर विराजमान किया गया है। रियासतकालीन चांदी का झूला बहुत भारी और कलात्मक है। सांगवान की लकड़ी पर चांदी का पतड़ा चढ़ाया हुआ है। इसके अलग-अलग हिस्से जिन्हे एक किया जा सकता है। सावन माह में ठाकुरजी को लहरिया पोशाक धारण करवाई गई है। झूला महोत्सव के दौरान ही मंदिर परिसर में सिंजारा,तीज और रक्षाबंधन पर विशेष उत्सव का आयोजन किया जाएगा। महोत्सव में चांदी के झूले में ठाकुरजी को विराजमान कर उन्हे झूलाया जाएगा और घेवर का भोग लगाया जाएगा।
सरस निकुंज में भी होग प्रतिदिन पदगायन
उधर सुभाष चौक,पानो का दरीबा स्थित सरस निकुंज में भी झूला महोत्सव मनाया जाएगा। मंदिर प्रवक्ता प्रवीण बड़े भैया ने बताया कि सिंजारा पूजन से रक्षाबंधन तक प्रतिदिन झूला महोत्सव के पदो का गायन किया जाएगा। शुक्र संप्रदाय पीठाधीश्वर अलबेली माधुरी शरण महाराज के सान्निध्य में वैष्णव भक्त विशेष अवसरों पर उत्सव मनाएंगे।