April 4, 2025, 3:08 am
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गुप्त वृंदावन धाम द्वारा रामनवमी पर पहली बार होगा राज्य स्तरीय गीता प्रतियोगिता का आयोजन…

जयपुर। राजस्थान सरकार और हरे कृष्ण मूवमेंट, गुप्त वृंदावन धाम के संयुक्त प्रयास से इस रामनवमी पर एक ऐतिहासिक पहल की जा रही है। पहली बार पूरे राजस्थान के स्कूली छात्रों के लिए राज्यस्तरीय भगवद गीता प्रतियोगिता का आयोजन किया जा रहा है। हरे कृष्णा मूवमेंट जयपुर के कार्यक्रम संयोजक सिद्ध स्वरूप दास ने बताया कि प्रतियोगिता में राज्यभर के कक्षा 7वीं से 12वीं तक के छात्र-छात्राएं घर बैठे ऑनलाइन परीक्षा में भाग लेंगे।

यह परीक्षा 6 अप्रैल 2025 को आयोजित की जाएगी। प्रतियोगिता के विजेताओं को न केवल राज्य स्तर पर सम्मान और प्रमाण पत्र मिलेगा, बल्कि 1 लाख 50 हजार रुपए तक के नकद पुरस्कार भी प्रदान किए जाएंगे। इस अवसर पर प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले विद्यार्थी को 11,000 रुपए, द्वितीय स्थान प्राप्त करने वाले को 5,100 रुपए एवं तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले विद्यार्थी को 2,100 रुपए का पुरस्कार प्रदान किया जाएगा।

शिक्षा मंत्री मदन दिलावर करेंगे विजेताओं का सम्मान…

सिद्ध स्वरूप दास ने बताया कि इस प्रतियोगिता का उद्देश्य हर छात्र तक गीता का संदेश पहुंचाना है। प्रतियोगिता की विशेषताएं यह है कि इसकी परीक्षा पूरी तरह ऑनलाइन होगी। प्रश्नपत्र बहुविकल्पीय (एमसी क्यू) होगा। प्रथम चरण 6 अप्रैल को आयोजित होगा। द्वितीय चरण 4 मई को जिला टॉपर्स के लिए राज्य स्तरीय परीक्षा के रूप में होगा। 15 मई को जयपुर के गुप्त वृंदावन धाम जगतपुरा में शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के करकमलों से विजेताओं को सम्मानित किया जाएगा।

पचास हजार से अधिक विद्यार्थियों ने करवाया रजिस्ट्रेशन…

प्रतियोगिता के लिए रजिस्ट्रेशन चल रहे हैं और अब तक 50,000 से अधिक विद्यार्थी इस प्रतियोगिता के लिए रजिस्ट्रेशन कर चुके हैं। पूरे राज्य से जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है। प्रतियोगिता की तैयारी के लिए विद्यार्थियों को स्कूल ऑफ गीता यूट्यूब चैनल पर ऑनलाइन वीडियो, ऑडियो गीता, अभ्यास प्रश्न, और अन्य डिजिटल सामग्री उपलब्ध करवाई गई है। इसके साथ-साथ ज़ूम के माध्यम से 7 दिवसीय विशेष प्रशिक्षण श्रृंखला भी संचालित की जा रही है, जिसमें परीक्षा प्रक्रिया, पाठ्यक्रम और सफलता के टिप्स साझा किए जा रहे हैं।

गीता पढ़ो, गीता जानो, जीवन सवारो…

शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने कहा, “भगवद गीता केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं है, यह जीवन का मार्गदर्शन है। विद्यार्थियों को यदि प्रारंभ से ही गीता के ज्ञान से जोड़ा जाए, तो वे न केवल संस्कारी बनेंगे बल्कि समाज और देश के लिए एक प्रेरणा बनेंगे।” यह प्रतियोगिता न केवल ज्ञान की एक प्रतियोगिता है, बल्कि यह संस्कार और संस्कृति को भावी पीढ़ी तक पहुँचाने का एक सशक्त माध्यम भी है।

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